केशव सेवा समिति द्वारा संचालित

डॉ० शन्नो रानी सरस्वती कन्या महाविध्यालय

सिंघारपुर मथुरा रोड अलीगढ–202001
डॉ० भीमराव अम्बेडकर विश्वविध्यालय आगरा से सम्बद्धता पात्र विवरणिका-
डॉ० शन्नो रानी सरस्वती कन्या महाविध्यालय की स्थापना निम्न कारणों को ध्यान में रखते हुए की गई है।
ग्रामीण क्षेत्र की बालिकाओं को उच्च शिक्षा प्राप्त कराने के साथ-साथ उन्हें भारतीय संस्कृति एवं परम्पराओं के प्रति जागरूक करना।

आज हमारे युवा वर्ग में भारतीय संस्कृति एवं सामाजिक मूल्यों का अभाव है उनमें एक प्रकार की अधीरता, आकुलता, आक्रोश एवं उदंडता परिलक्षित हो रही है, उनमें अनेक चारित्रिक गुण तथा निर्णय शक्ति, तर्क करना, सहिष्णुता, स्नेह आदि का अभाव है जिस कारण उनके व्यक्तित्व का संतुलित विकास नहीं हो पाता अतः समाज में अलगाव, विघटन, हिंसात्मक प्रवृत्तियाँ निरन्तर विकसित हो रही हैं , इन सभी चारित्रिक गुणों का विकास शैशवावस्था से ही परिवार में होता है। माँ बालक की प्रथम शिक्षक होती है जिसके द्वारा बालक को संस्कार प्राप्त होते हैं। आज की बालिका ही भविष्य में माँ के उत्तरदायित्व का निर्वहन करेगी अतः बालिका का शिक्षित होना बालक के विकास एवं राष्ट्र निर्माण के लिये अनिवार्य है।.

इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु प्रबुद्ध गणमान्य नागरिकों की समिति का गठन किया गया जिसमें बालिकाओं की उच्च शिक्षा के लिए ग्रामीण क्षेत्र सिंघारपुर में डॉ० शन्नो रानी सरस्वती कन्या महाविध्यालय की स्थापना करने का निर्णय लिया गया जिसका प्रमुख प्रेरणा स्त्रोत होने का श्रेय डॉ० डीo कुमार जी एवं उनकी धर्मपत्नी डॉ० शन्नो रानी को जाता है उनका सहयोग अविस्मरणीय एवं अतुलनीय है। इसके अतिरिक्त समिति के हर सदस्य ने अपनी सामर्थ्यं अनुसार शारीरिक, आर्थिक सहयोग प्रदान किया है उनमें प्रमुख रूप से श्रीमती शशिवाला अग्रवाल, श्री राजीव गर्ग (दिवाकर फाइनेन्स), श्री श्याम नारायण अग्रवाल, डॉ० संजय अग्रवाल, श्री राजीव अग्रवाल (अल्फा), श्री संजीव रत्न अग्रवाल, डॉ० चन्द्रेश भाटिया (ENT), श्री महेश अग्रवाल (केo हार्डवेयर), सुनील कुमार गर्ग, अजय वार्ष्णेय (सर्राफ), अरविन्द वार्ष्णेय (सर्राफ) एवं श्री ओंकार नाथ अग्रवाल के अथक परिश्रम के फलस्वरूप महाविध्यालय बालिकाओं की उच्च शिक्षा के लिये जुलाई 2017 से प्रारम्भ हो रहा है। महाविध्यालय में सर्वांग सम्पूर्ण शिक्षा देने की दृष्टि से एक विशिष्ट शिक्षा योजना का निर्माण किया गया है। यह शिक्षा महाविध्यालय की पंचमुखी शिक्षा है, जिसके पाँच अंग शारीरिक, व्यवहारिक, कला-विषयक, नैतिक और बौद्धिक हैं।

हमारा उद्देश्य बालिकाओं को स्वावलम्बी बनाने के साथ-साथ जीवन में हर परिस्थिति से संघर्ष करने योग्य बनाना है जिससे वे अपने भविष्य को उज्जवल बनाने के साथ-साथ उत्तम नागरिकों का निर्माण कर देश की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप समाज निर्माण, उद्यमिता, संगठनों एवं संस्थाओं के प्रबन्धन में सक्रिय भूमिका निभा सकें।

केशव सेवा समिति एक परिचय...


अपने देश का पूर्वोत्तर क्षेत्र अनादि काल से पौराणिक, प्राकृतिक सम्पदा, रणनीति एवं सामाजिक महत्व का क्षेत्र रहा है। देश के हृदय स्थल से दूर होने के कारण स्वतन्त्रता के उपरान्त भी इस क्षेत्र का विकास से अछूता ही बना रहा क्योकि इस क्षेत्र में वनवासी क्षेत्र एवं अधिक आबादी पर होने के कारण रेल एवं सड़क मार्ग का निर्माण भी नहीं हुआ। जिस कारण इस क्षेत्र का बहुत बड़ा भाग भारत मुख्य धारा में नहीं जुड़ पाया।

इस कारण विदेशी अलगाववादी शक्तियों ने इस पूर्वोत्तर के दूर दराज के क्षेत्रों में देश, धर्म भारतीय संस्कृति से अलग करने का कुत्सित प्रयास हो रहा है। जिस कारण वहां की बहुत बड़ी आबादी का धर्म परिवर्तन हो गया है। जिन नागरिकों के धर्म परिवर्तन स्वीकार नहीं किया वहां उन्हें विस्थापितों की तरह रहना पड़ रहा है।

ऐसे विस्थापित परिवारों के बालकों का पालन-पोषण एवं भारतीय संस्कृति से ओत प्रोत शिक्षा द्वारा स्वावलम्बी, संस्कारवान एवं राष्ट्रभक्त नागरिकों का निर्माण करने के लिए राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ ने सन् 2002 ई० में भारत के अंतर्गत साधन सम्पन्न क्षेत्रों में छात्रावास खोलने की योजना बनाई।

इसी योजना के अन्तर्गत कासिमपुर पाॅवर हाउस में किरायें के भवन में छोटा सा छात्रावास सन् 2003 में 7 बालकों से प्रारम्भ किया। भवन किराये का एवं छोटा होने के कारण सन् 2005 में समाज के उदारवान बन्धुओं के सहयोग से सर्वप्रथम 4 बीघा भूमि मथुरा रोड स्थिति गाँव सिंघारपुर, अलीगढ़ में क्रय की गयी उसमें धीरे-धीरे 12 बीघा भूमि और क्रय की गयी, इस भूमि एक 70 बालकों का भव्य छात्रावास एवं विशाल सभागार की निर्माण किया गया इसके साथ ही विशाल देवालय (जिससे कि बच्चे आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर सके।

इसमें एक गो सदन जो अस्थाई से चल रहा का स्थाई निर्माण कराया जायेगा। गो सदन का निर्माण का उद्देश्य क्योकि पूर्वोत्तर में गो-मास खाया जाता है अतः बच्चे गो-माता का महत्व जाने एवं इसके प्रति मां का भाव पैदा हो।

एक प्रकल्प में प्राकृतिक चिकित्सा का केन्द्र का निर्माण किया गया जिसमें चिकित्सा कार्य प्रारम्भ हो चुका है।

इसी क्रम में कन्याओं के लिए एक उच्च शिक्षा का केन्द्र खोला जा रहा है क्योकि ग्रामीण क्षेत्र की कन्याओं के लिए सभी केन्द्र आध्यात्मिक दूरी एवं शिक्षा केन्द्रों की कमी के कारण कन्यायें शिक्षा से वंचित रह जाती है। अतः भारतीय संस्कृति से ओत प्रोत उच्च शिक्षा का केन्द्र खोला जा रहा है।